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एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…

1.

खुदी को कर बुलन्द इतना,

कि हर तकदीर से पहले |

खुदा बन्दे से खुद पूछे,

बता तेरी रजा क्या है |

2.

लक्ष्य न ओजल होने पाये,

कदम मिलाकर चल |

मंजिल तेरे पग चूमेगी,

आज नहीं तो कल |

3.

अगर जिन्दगी है तो ख्वाब है,

ख्वाब है तो मंजिलें हैं,

मंजिलें हैं तो रास्ते हैं,

रास्ते हैं तो मुश्किलें हैं,

मुश्किलें हैं तो हौसले हैं,

हौसले हैं तो विश्वास है,

कि जीत हमारी है |

4.

इन्सान सुर्खरु होता है,

आफतें आने के बाद |

हिना रंग लाती है,

पत्थर पे पिस जाने के बाद |

5.

कौन कहता है कि आसमान में

सुराख़ हो नही सकता,

एक पत्थर तो

तबीयत से उछालो यारों |

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