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“गुरु” – गुरु पूर्णिमा 2019 – गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई!

“गुरुब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेव महेश्वर: , गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम: “

‘गुरु’ शब्द में ‘गु’ का अर्थ है ‘अंधकार’ और ‘रु’ का अर्थ है ‘प्रकाश’ अर्थात गुरु का शाब्दिक अर्थ हुआ ‘अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक’। सही अर्थों में गुरु वही है जो अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करे और जो उचित हो उस ओर शिष्य को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे।”गुरु” कोई “व्यक्ति” नहीं, कोई “शरीर” नहीं, “गुरु” एक “तत्व” है , एक “शक्ति है” । “गुरु” यदि “शरीर” होता, तो इस छोटी सी “दुनिया” में, एक ही “गुरु” “पर्याप्त” होता । “गुरु” एक “भाव” है, “गुरु” “श्रद्धा” है । “गुरु” “समर्पण” है । आपका “गुरु: आपके “व्यक्तित्व” का “परिचय” है । “कब” “कौन”, “कैसे” आपके लिये “गुरु” “साबित” हो, यह आप की “दृष्टि “एवं “मनोभाव “पर निर्भर करता है । “गुरु” “प्रार्थना” से मिलता है । “गुरु” “समर्पण” से मिलता है, “गुरु” “दृष्टा” “भाव” से मिलता है, “गुरु” “किस्मत: से मिलता है । और………. “गुरु” “किस्मत” वालों को “मिलता” है ।

हिन्दू धर्म में गुरु को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। कहते हैं भगवान से भी पहले गुरु का स्थान होता है। गुरु और गुरु पूर्णिमा दोनों का ही विशेष महत्व है। इस साल 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है। यह पर्व अपने आराध्य गुरु को श्रद्धा अर्पित करने का महापर्व है। गुरुब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेव महेश्वर: , गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम: अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।

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